नगर निगम होर्डिंग कारोबार में पुलिंग खेल

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नगर निगम के होर्डिंग टेंडर में वर्ष 2003 में दिल्ली की एक कंपनी को दो सालो के लिए टेंडर दिए जाने पर बबाल भी मच चूका है इस मामले को लेकर जांच भी हुई लेकिन क्या इस होर्डिंग कारोबार वाली कंपनी को ब्लैक लिस्ट क्यों नहीं किया गया इसको लेकर आज सब कारोबारी जांच की मांग क्यों नहीं करते इसका जवाब किसी को नहीं मिलता ऐसे में कैसे मान लिया जाए होर्डिंग टेंडर नगर निगम में कारोबारी लोग अपनी मर्जी से रेट तय करके डालते है।

देहरादून नगर निगम में होर्डिंग टेंडर को लेकर कारोबारियों ने पूलिंग के खेल को अंजाम देते हुए टेंडर में रेट का खेल अंजाम दिया है नगर निगम देहरादून ने होर्डिंग टेंडर को डाले जाने की अंतिम डेट 17 सितम्बर है हर साल नगर निगम देहरादून होर्डिंग कारोबार से राजस्व सरकारी खजाने में वसूल करता है पिछले लम्बे समय से इस कारोबार को करने वाले राजनेता से लेकर कई ऐसे लोग होर्डिंग कारोबार को करते आ रहे है नगर निगम में जिसका मेयर उसकी सरकार वाला खेल अंजाम दिया जाता है।

नगर निगम होर्डिंग कारोबार में पुलिंग खेल

होर्डिंग से प्रचार प्रसार किये जाने के लिए देहरादून के नगर निगम में टेंडर निकाला जाता है हर साल ये टेंडर ऑनलाइन नहीं हुआ करता था लेकिन इस बार नगर निगम ने ऑनलाइन टेंडर निकाला है जिसकी अंतिम डेट 17 सितम्बर है पहली बार ऑनलाइन निकाले गए होर्डिंग टेंडर को लेकर इस बार भी कुछ कारोबारी इसमें पुलिंग करते हुए अपने हिसाब से रेट डाले जाने के खेल को अंजाम दे चुके है।

अब होर्डिंग कारोबार का काम देहरादून नगर निगम में बाँट लिया गया है ऐसे में नगर निगम के अंदर होर्डिंग टेंडर में पहले से ही कारोबार अपने रेट तय करने के बाद वही रेट नगर निगम के टेंडर में डालते है ताकि टेंडर कारोबारी के रेट के हिसाब से छूट जाए।

 


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