भंडाफोड़  स्वयं भू महामंडलेश्वर                                           भंडाफोड़ स्वयं भू महामंडलेश्वर
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भंडाफोड़  स्वयं भू महामंडलेश्वर                                                                कैसे मीडिया के पथ पर रहकर हो रहा है कुछ लोगो के सहारे जासूसी का खेल, ये जासूस कोई और नही बल्कि आपके पास रहने वाले वो लोग है जिनकी खाल इंसान की नही बल्कि भेड़िए की है चलिए बात करते है सबसे पहले मीडिया के उन लोगो की कहानी जो बिना चाटुकारिता के अपनी कलम का बखूबी समाज हित मे पत्रकारिता को अंजाम दे रहे है                                   भंडाफोड़  स्वयं भू महामंडलेश्वर                                           भंडाफोड़ स्वयं भू महामंडलेश्वर                         ऐसे लोग उत्तराखण्ड में काफी अधिक नही है सीमित संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो इनकी खबरों में जनहित के लक्षण देखे जाते है इनके नामो का बखान किया जाना यहाँ उचित नही होगा क्योंकि अगर हमने इनके नामो को लिखा तो इसको भी कुछ लोग चाटूकारिता की चासनी में लपेट कर पत्रकारों की उस जमात के *स्वयं भू महामंडलेश्वर* तक पहुँचा देगें और शुरू हो जाएगा सच को दबाने का *सकुनी मामा का खेल* लेकिन ऐसा अब नही होगा क्योंकि डिजिटल क्रांति ने कई लोगो के ऐसे राज भी खोल दिये है जिनका आभास उनको अभी नही , चलिए बात करते है उनके कुछ कारनामो की जिनकी वजह से आज पूरा मीडिया का कुनबा ऐसे घुन के रूप में सिमट गया है जिसको ये *स्वयं भू महामंडलेश्वर* आज तक अपनी नीति के दम पर अंजाम देते आए है तो कुछ ऐसे राज आपको इस कहानी में समय समय पर उजागर किए जाएंगे जिसका असली किरदार से मतलब होगा अगर आपके पास भी ऐसे *स्वयं भू महामंडलेश्वर* की कोई राज दार कहानी है तो हमें जरूर भेजें हमारा वादा है आपके नाम को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा क्योंकि कहावत है *बिल्ली के गले मे घंटी बँधे कौन* इसलिए नाम को गोपनीय रखने की बात का यहाँ जिक्र किया गया है आज बस इतना ही अगले अंक में होगी एक नई चर्चा नई जानकारी के साथ तब तक अलविदा दोस्तो


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