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केदारनाथ से नारायण परगाई की रिपोर्ट
केदारनाथ के कपाट आज बंद हो गए शुक्रवार को पहाड़ो में ठंडी के बाद भी काफी संख्या में लोगो की आस्था का संगम केदारनाथ में मौजूद रहा केदारनाथ के मंदिर में आस्था का सैलाब जिस तरह रहा वो साबित कर रहा था की अब राज्य में चारधाम यात्रा को लेकर फिर से आस्था के पथ पर धार्मिक लोगो की आवाजाही जारी हो गयी है और लोग अपने दिलो से अब उस खौफ को निकाल चुके है केदारनाथ में यात्रा करने वाले लोगो की संख्या लाखो में रही इस वर्ष यात्रा मार्ग पर काफी संख्या होने के कारण रोजगार के भी अवसर मिल पाये

आठवीं शताब्दी का भगवान शिव का यह मंदिर समुद्र तल से 3,581 मीटर की उंचाई पर स्थित है। यह मंदिर हिमपात के कारण हर साल अक्टूबर-नबंवर में बंद हो जाता है और अप्रैल-मई में दोबारा खोला जाता है। मंदाकिनी नदी के शीर्ष पर शोभायमान गढ़वाल हिमालय के बीच यह मंदिर स्थित है। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम की प्रसिद्धि 5वें ज्योतिर्लिंग के रूप में है। यहां के शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया। केदारनाथ के संबंध में लिखा है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किये बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल जाती है। केदारनापथ सहित नर-नारायण-मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों के नाश पूर्वक जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है। इस मन्दिर की आयु के बारे में कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, पर एक हजार वर्षों से केदारनाथ एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा रहा है।
बाबा केदारनाथ के कपाट हर साल छ महा के लिए बंद होते है


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