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महिला सिपाही की मौत तमाशा देखते रहे लोग हरिद्वार लोगों का अमानवीय चेहरा ऐसे समय में सामने आता रहता है सड़क हादसे के समय लोग भीड़ जमा कर मोके पर वीडियो बनाते हुए नज़र तो आते है लेकिन कोई भी इलाज के लिए घायल को अस्पताल ले जाने की जुगत नहीं करता अकसर इसी तरह नज़ारा हादसे वाली जगह पर आप ने भी देखा होगा इस खबर में भी हम आपको यही बताने की कोशिश कर रहे कैसे घायल महिला मोके पर जिंदगी और मौत से जूझ रही थी लेकिन तमाशबीन लोगो की भीड़ उसकी जान नहीं बचा पाई अगर समय रहते उसको इलाज मिल जाता तो शायद वो जिंदगी जी रही होती।

हरिद्वार में चिन्मय डिग्री कॉलेज चौक के पास स्कूटी पेड़ से टकराने के कारण महिला कांस्टेबल की मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारियों ने जिला अस्पताल पहुंचकर घटना की जानकारी ली। हालांकि, दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल सका।
दुर्घटना के बाद लोगों का अमानवीय चेहरा भी सामने आया। खून से लथपथ महिला कांस्टेबल सड़क पर तड़पती रहीं, लेकिन तमाशबीन बने राहगीर मोबाइल से वीडियो बनाते रहे। इसी दौरान भीड़ देख ठहरीं एक बुजुर्ग महिला उन्हें रिक्शा में लादकर मेट्रो अस्पताल ले गईं, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। यदि महिला कांस्टेबल को तुरंत उपचार मिल गया होता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
बताया जा रहा है कि मृतका ने हेलमेट पहना हुआ था। वहीं, महिला कांस्टेबल की मौत से हरिद्वार पुलिस में शोक की लहर दौड़ गई। हरिद्वार कोतवाली में तैनात महिला कांस्टेबल विजय लक्ष्मी (46) पत्नी स्वर्गीय अश्वनी कोर्ट पैरोकार की ड्यूटी कर रही थीं। रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह भी वह कोतवाली से रोशनाबाद कोर्ट के लिए निकली थीं। रास्ते में चिन्मय डिग्री कॉलेज चौक के पास पहुंचते ही उनकी स्कूटी डिवाइडर में खड़े पेड़ से जा टकराई।
एक राहगीर महिला ने कांस्टेबल को मेट्रो अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतका के माथे और मुंह पर चोटें आई हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि दुर्घटना कैसे हुई। मौके पर सीसीटीवी कैमरा भी नहीं है, जिससे तस्वीर साफ सके।

कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह, रानीपुर कोतवाली प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट, एसओ सिडकुल प्रशांत बहुगुणा तुरंत मेट्रो अस्पताल पहुंचे। यहां से शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी भेजा गया। इधर, आला अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर अधीनस्थों से घटनाक्रम की जानकारी ली। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि वर्ष 2005 में पति की मौत के बाद मृतका को आश्रित कोटे से नौकरी मिली थी। उनके दो बेटे और एक बेटी है। परिवार के अन्य लोग हरिपुर कलां, ऋषिकेश में रहते है।


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