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निर्दलीय विधयाको का राजनैतिक कोकटेल सत्ता का रेड कारपेट
नारायण परगाई
देहरादून भाजपा कांग्रेस और दूसरे दलो को ये सोचना जरुरी हो गया है की क्या राज्यो में निर्दलीय विधायको की ब्लैक मेलिंग इसी तरह चलती रही तो राज्यो की राजनीती से भाजपा कांग्रेस सहित उन दलो का अस्तित्व खत्म हो जायेगा जो अपने अपने राज्यो में राजनैतिक विकास का ढोल पीट कर अपनी सरकारों को बनाये जाने को सपना जनता को दिखा रहे है सत्ता की लड़ाई से लेकर मंत्री मंडल में जगह पाने के लिए जिस तरह कई राज्यो में निर्दलीय विधायको की राजनैतिक ब्लैक मेलिंग का नया चरण सुरु हुआ है वो राज्यो की राजनिति के लिए सही संकेत नहीं
उत्तराखंड में निर्दलीय विधायको को सत्ता का रेड कारपेट
राज्यो की राजनीती में जिस तरह निर्दलीय विधायको की राजनैतिक ब्लैकमेलिंग बढ़ती जा रही है वो कही न कही भाजपा कांग्रेस और दूसरे दलो की राजनैतिक सोच पर भी घुन लगाती नज़र आ रही है सत्ता की चोखट तक पहुच चुकी निर्दलीय विधायको की राजनैतिक ब्लैकमेलिंग का ही असर है की आज कई राज्यो में निर्दलीय विधायक सत्ता की मलाई को खा रहे है उत्तराखंड सरकार में निर्दलीय विधायक वर्तमान समय में सरकार में मंत्री बने हुए है जो इस बात का ताज़ा उदाहरण है की किस तरह राज्य में दिनेश धने,मंत्री प्रसाद नैथानी,हरीश दुर्गापाल सत्ता में अपनी भागीदारी को राजनैतिक कॉकटेल के माध्यम से कांग्रेस में उन लोगो को दूर कर बैठे है जिन लोगो ने चुनावी समर में इन निर्दलीय विधायको को हराने के लिए एक सच्चे कार्यकर्ता के रूप में अपनी ताकत को लगाया था लेकिन चुनाव जीत का सत्ता में मंत्री की कुर्सी से लेकर मन पसदं विभाग को लेकर भी अपनी राजनैतिक ब्लैक मेलिंग को जारी रखा सत्ता में होने के बाद भी कांग्रेस इस राजनैतिक ब्लैक मेलिंग को नहीं रोक पायी क्यों की सत्ता में सरकार बनाये जाने के लिए इन का समर्थन जरुरी था
मधु कोढ़ा जैसे निर्दलीय विधयाक भी बने मुख्यमंत्री
अगर देश की राजनीती की बात की जाये तो मधु कोढ़ा जैसे निर्दलीय विधयाक राज्य का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक विराजमान हुए ये ये कहा जाये की सत्ता की पूरी ताकत निर्दलीय विधायक के हाथो में आ गयी लेकिन बाद में सत्ता की कुर्सी जाने के बाद यही निर्दलीय विधायक जेल की हवा तक खा चुके मतलब साफ था की सत्ता की कुर्सी पर विराजमान होने के बाद सरकार का इतना दोहन किया गया की राजनीती दूषित होती चली गयी नतीजा ये रहा की आज निर्दलीय विधायक अपनी राजनैतिक जमीं तक बज़र कर चुके है कई राज्य वर्तमान समय में निर्दलीय विधायको की राजनैतिक ब्लैक मेलिंग का शिकार बने हुए है ऐसे में सवाल उठ रहा की क्या राजनैतिक दल इन की राजनैतिक ब्लैक मेलिंग पर कभी विराम लगा पाएंगे या इसी तरह राजनैतिक ब्लैक मेलिंग जारी रहेगी


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