जिंदल ग्रुप का विरोध या विकास का विरोध

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अल्मोड़ा सरकार जहा पर्वतीय जनपदो में विकास का रोड मैप तैयार करने में जुटी हुई है वही सरकार का विरोध विकास का विरोध के रूप में सामने आ रहा है इस राज्य के निर्माण से लेकर आज तक ये राज्य विकसित क्यों नहीं हो पाया इस पर भी विचार किया जाना जरुरी है राज्य सरकार का कदम जहा प्रदेश के पर्वतीय जनपदो को विकसित किया जाना है वही वहाँ रोजगार के साधन भी उपलब्ध करवाना है इसी कड़ी में राज्य सरकार ने जिंदल ग्रुप को जमीन देकर नयी पहल की है जिस का विरोध क्यों हो रहा है ये बड़ा सवाल है खबर है की राज्य सरकार को फ़ैल करने के लिए कुछ राजनैतिक लोगो की अपनी जमीनी पकड़ खोकली हो गयी है और वो राज्य में अपनी जमीन को बचाने के लिए इस तरह की रड़नीति को अमली जामा पहना रहे है खबर है की उत्तराखंड प्रदेश में जिंदल ग्रुप के खिलाफ महाआंदोलन शुरू हो चुका है। अल्मोड़ा जिले में जिंदल ग्रुप को सरकार द्वारा जमीन देने पर लोगों का गुस्सा अब उग्र रूप ले रहा है।

उत्तराखंड सरकार द्वारा जिंदल ग्रुप को 353 नाली भूमि आवंटित करने के खिलाफ नानीसार बचाओ संघर्ष समिति और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की ओर से राज्य स्थापना की 15वीं वर्षगांठ पर ग्रामीणों ने नानीसार में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने जुलूस निकाल कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया।

इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि गांव से लगी 353 नाली सरकारी जमीन आवंटित कर देने से गांवों का गौचर (चारागाह) और पनघट प्रभावित हो गया है। उन्होंने लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नानीसार का इलाका दशकों से आबाद है और सरकार इसे गैर आबाद गांव बताकर जमीन आवंटित करने की बात कर रही है।

ग्रामीणों ने दो-टूक कहा कि भूमि का आवंटन रद करने और आंदोलनकारियों पर लगाए गए झूठे मुकदमे वापस होने के बाद ही आंदोलन समाप्त किया जाएगा।


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