खाकी में इंसान होता है शिवाजी बनकर विधवा विलाप क्यों

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खाकी में इंसान होता है शिवाजी बनकर विधवा विलाप क्यों: खाकी में इन्सान ही होता है पत्रकारिता में भी इंसान ही होता है अफसर भी इंसान ही होता है हर जगह इंसान ही होता है सोच कर देखो तो इंसान हर जगह होता है इन बातो का मतलब उन लोगो की तरफ इशारा करना है जो आपके को सिर्फ इंसान नहीं समझ रहे बल्कि सोशल मीडिया से लेकर तमाम जगह पर पुलिस को लेकर सवाल उठाते हुए शिवाजी बनकर उत्तराखंड के आंदोलन की तर्ज पर अपना विधवा विलाप कर रहे है उनका ये विलाप किया जाना क्या उतना जरुरी है जितना वो कर रहे है ये सवाल आपसे पूछने का मन हुआ तो लिख दिया जवाब का इंतज़ार रहेगा।

खाकी में इंसान होता है शिवाजी बनकर विधवा विलाप क्यों

खाकी में इंसान होता है शिवाजी बनकर विधवा विलाप क्यों

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कभी सकरात्मक सोच कर देखो सब कुछ सही नज़र आएगा जिनके मन में विष भरा हुआ हो वो साँप के समान माना जाता है ऐसे साँप उत्तराखंड के हर ज़िले में अपनी जगह पाए जाते है उनका मकसद सकरात्मक सोच नहीं बल्कि नकरात्मक सोच की वजह से अपनी ऊर्जा का गलत जगह उपयोग करते हुए हमेशा चर्चा का विषय बनकर घूमते रहते है कर कुछ नहीं पाते ठीक वैसे ही जैसे आंदोलनकारी कई नेता अपना स्वाभिमान बेच आज बेगार हो चुके है आखिर इंसान तो वो भी है।

देहरादून पुलिस का एक वीडियो जिसमे मारपीट करते हुए पुलिस कर्मी का दिखाया गया था देहरादून डीआईजी/एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने कारवाही करते हुए पुलिस कर्मियों को सबक तो सीखा दिया जैसा पुलिस की क़ानूनी किताब में लिखा हुआ होता है लेकिन इसके बाद भी पुलिस को कोस कर शिवाजी बने घूम रहे कुछ सोशल मीडिया वाले शिवाजी अब अपने अंदर के इंसान को भूल कर खाकी में इंसान को खोज रहे है सवाल उनसे ही है क्या इनके अंदर इंसान नहीं जो वो खाकी में इंसान खोज रहे है।


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