महाभारत में शकुनि मामा कलयुग में अभिमन्यू

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महाभारत में *शकुनि मामा कलयुग में अभिमन्यू खैर सब कुछ जाने के बाद अगर आपका मन जाग जाए तो यही सबसे बड़ा पूण्य है लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है जो सबकी कुंडली अपने खुफिया कैमरे में कैद करता हो उसको ये ना पता चले जिनका सरक्षण मिल रहा है वही उसको *अभिमन्यू* बनाने का कुचक्रों के माध्यम से खेला खेल रहे है वैसे कहा जाता है कलयुग में बहुत कुछ ऐसा होगा जिसकी काट नारद जी भी नही कर पाएंगे यही हो रहा है अच्छा होगा तभी तो हो रहा है वैसे ये सबक भी है उनके लिए जो अपने को *हंस* समझ कर मोती खाने का सपना कलयुग में देख रहे थे जबकि हकीकत में वो काले काव काव करने वाले *कौव्वे* थे            महाभारत में *शकुनि मामा कलयुग में अभिमन्यू

आपको याद होगा महाभारत में *शकुनि मामा* ने पांडवो के साथ छल करके चौसर की बिसात पर *भाइयो सहित पंचाली जो पांडवो की पत्नी* थी को जीत लिया था चूंकि ये अपमान हस्तिनापुर की राज सभा मे हुआ था लेकिन क्या कभी सोचा है सार्वजनिक *अपमान* अगर किसी का किया जाए तो वो इससे भी बड़ा अपमान होता है कलयुग में इस अपमान का बदला लेने के लिए महाभारत काल की तरह अस्त्र तो नही लेकिन *कूटनीति का चाणक्य* अवश्य जरूरी है तभी विजय पा सकोगें ये कहानी कलयुग की सत्य गाथा पर आधरित है इसका महाभारत काल से कोई लेना देना नही है इसीलिए इसको पढने के बाद अगर आपके विचार आएंगे तो उनका सम्मान करते हुए अधिकार स्वरूप उनको भी प्रकशित किया जाएगा कोई विचार आपका *मौलिक अधिकार* है

प्रकृति के तीन कड़वे नियम जो सत्य है….स्वीकारे ना स्वीकारे पर बदले ना जा सके सत्य तो सत्य रहेगा

1- प्रकृति का पहला नियम:- यदि खेत में बीज न डालें जाएं तो कुदरत उसे घास-फूस से भर देती हैं !
ठीक उसी तरह से दिमाग में सकारात्मक विचार न भरे जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं !

2- प्रकृति का दूसरा नियम:- जिसके पास जो होता है वह वही बांटता है ?
सुखी सुख बांटता है,
दुःखी दुःख बांटता है,
ज्ञानी ज्ञान बांटता है,
भ्रमित भ्रम बांटता है,
भयभीत भय बांटता हैं !

3- प्रकृति का तीसरा नियम:- आपको जीवन से जो कुछ भी मिलें उसे पचाना सीखो क्योंकि भोजन न पचने पर रोग बढ़ते हैं.
पैसा न पचने पर दिखावा बढ़ता है.
बात न पचने पर चुगली बढ़ती है.
प्रशंसा न पचने पर अंहकार बढ़ता है.
निंदा न पचने पर दुश्मनी बढ़ती है.
राज़ न पचने पर खतरा बढ़ता है.
दुःख न पचने पर निराशा बढ़ती है.
और सुख न पचने पर पाप बढ़ता है.

बात कड़वी बहुत है पर सत्य हैं
चलिए आज इतना ही फिर किसी सत्य गाथा के पथ पर चलता हूँ खोज में ताकि आपको बता सकू अगली सत्य गाथा का सच


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