मी टू के बाद ही टू

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देहरादून । उत्तराखंड में वैसे तो मी टू विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है लेकिन केदारनाथ की यात्रा पर ऐसा कुछ हुआ कि एक पत्रकार को रात में अपना बिस्तर छोड़ना पड़ा इसकी वजह क्या रही इसे लेकर हर कोई चर्चा करता नजर आ रहा है त्योहारी सीजन में दीपावली के दिन बाबा केदारनाथ की यात्रा पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आना था तो ऐसे में कवरेज करने के लिए देहरादून से लेकर दिल्ली तक मीडिया कर्मियों का भी जमावड़ा बाबा केदार की नगरी में लगना तय था ।

मी टू के बाद ही टू

देहरादून से मीडिया कर्मियों की कई टोलियां बाबा केदारनाथ में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कवरेज करने के लिए गई थी आखिर 6 नवंबर की रात ऐसा क्या हुआ जब एक पत्रकार को देर रात में ही अपना बिस्तर छोड़ना पड़ा हालांकि सूत्रों से यह जानकारी भी मिल रही है कि यह एक ऐसा घटनाक्रम है जिसमें शराब का नशा इस कदर हावी रहा जिसने अपने साथी के साथ असा कुछ किया जिसको लेकर मीडिया कर्मी ये चर्चा करते नज़र आ रहे है वहाँ उस रात ही टू कर दिया गया लेकिन हम इस खबर में ना तो पीड़ित पक्ष के नाम का खुलासा कर रहे हैं और ना ही उस पक्ष का खुलासा कर रहे हैं जिसने उस रात ही टू बजाया है ।

मीडिया कर्मियों के बीच में यह खबर दीपावली के दिन से वायरल हो रही है चर्चा का केंद्र बनी यह खबर बाबा केदारनाथ से आते वक्त उड़न खटोले में भी चर्चा का विषय बनी रही जिसे लेकर हर कोई अपना पेट पकड़कर हस तो रहा है लेकिन ना तो पीड़ित पक्ष की चर्चा कर रहा है और ना ही उसकी जिसने देर रात ही टू वाले काम को अंजाम दिया है ।

एक मीडिया कर्मी के पूरा मामला अपना नाम नहीं छापे जाने के बारे में जानकारी देते हुए बताया की
पूरा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार है देहरादून से जाते समय ही इस पत्रकार का दिल उस पर आ गया था जो व्यासी के बाद से ही इस के निशाने पर बन गया था और बाबा केदार जाने से पहले गुप्तकाशी में जिस जगह रुकने की व्यवस्था की गई थी वही उस रात ऐसा हुआ कि रात के अंधेरे में उस पत्रकार को अपना बिस्तर छोड़ना पड़ा सुबह का जब उजाला हुआ तो मीडिया कर्मियों में बिस्तर खाली देखकर हड़कंप मच ना तो लाजमी था तो ऐसे में चर्चा तेज हो गई कि आखिर रात के अंधेरे में ऐसा क्या हुआ जिसको लेकर अब मीडिया कर्मियों में ये चर्चा का केंद्र बिंदु बनी हुई है।

देहरादून से नज़र में बना हुआ ये मामला व्यासी के बाद परवान चढ़ता हुआ नज़र आया जिसकी आवाज़ दीपवाली के एक दिन पहले उस रात देखी गई जब बिस्तर से एक पत्रकार गायब मिला था जिसके बाद वही इस मामले में कुछ होता लेकिन लोक लाज से भय से इस मामले पर किसी ने कुछ नहीं किया और दीपावली के पटाखों की गूंज में इस चर्चा की आवाज़ गुम हो गई ।

भड़ास फॉर इंडिया इस समाचार को सिर्फ इस मकसद से प्रकशित कर रहा है ताकि इस तरह का कारनामा फिर से कभी अंजाम नहीं दिया जाये क्योकि जिस धार्मिक जगह पर ही टू किये जाने की चर्चा है अगर वो सही है तो इसको अंजाम दिया जाना आखिर इस नए नवेले द्वारा करवाया गया काम अब सिर्फ मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है जिसको अब राजनैतिक गलियारो से लेकर अधिकारी वर्ग में भी काफी सुना जा रहा है इस समाचार का मकसद किसी की मानसिक हालत को खराब किया जाना नहीं है बल्कि बिना हसे इस समाचार को पढ़े जाने की है।


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