उत्तरांचल प्रेस क्लब चुनाव में दग़ाबाज़ी वाले बेपर्दा

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उत्तरांचल प्रेस क्लब चुनाव में दग़ाबाज़ी वाले बेपर्दा देहरादून उत्तरांचल प्रेस क्लब चुनाव में मिली जीत या हार कोई मायने नहीं रखती लेकिन यूनियन की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाने वाले वो नाम जिन पर भरोसा करके आखिर यूनियन ने ऐसा कदम उठाने में क्यों हामी भरी जिनके जिनका भरोसा विश्वासघात से भरा था कई सवाल ऐसे भी है जिनका उत्तर आना अभी शेष है सवालों का उत्तर इसलिए भी लाजमी है कि कहां पर चूक हुई यह चुनाव सिर्फ कोषाध्यक्ष के पद और कार्यकारिणी की सदस्य पदों पर होना था अगर चुनाव दूसरे पदों पर होता तो तस्वीर क्या होती इसका आकलन करना भी बहुत जरूरी है।

कोषाध्यक्ष के पद पर महज 3 वोटों से यूनियन का जीतना उन लोगों पर शक की निगाह घुमा रहा है जिन्होंने यूनियन में साथ रहकर अपना चेहरा तो दिखाया लेकिन मतदान करने में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई यह एक बड़ा सवाल है क्या उनका अपना स्वार्थ यूनियन से बड़ा था जो अपना किरदार बखूबी निभा गए और सवालों को यूनियन के नाम कर अगले साल का इंतजार करेगें चुनाव में असल किरदार किसने निभाया इन किरदारों को खोजने में यूनियन को ज्यादा वक्त तो नहीं लगेगा लेकिन इस चुनाव में वह चेहरे भी बेपर्दा हो गए जो पर्दे के पीछे से अपना खेल बखूबी खेलते रहे।
उत्तरांचल प्रेस क्लब की राजनीति में चाणक्य की भूमिका निभाने वाले नवीन जी भी उनकी भावनाओं को नहीं समझ पाए जो उनके साथ रहकर इतना बड़ा और चुनाव का परिणाम यूनियन के अनुकूल नहीं कर पाने का भरोसा तोड़ते नजर आए अब ऐसे फैसले निश्चित रूप से एक नई मिसाल बने और आने वाले समय के लिए एक ठोस पहल को किए जाने का ध्वजवाहक बने ऐसी उम्मीद उनसे जरूर की जानी चाहिए जो दिन रात मेहनत करके आपके साथ खड़े रहे लेकिन क्या उन चेहरों पर नकाब डाला जाना उचित होगा जो आपके साथ रहकर दगाबाजी कर गए।
कार्यकारिणी के सदस्य पदों पर भी कुछ ऐसा ही खेल पर्दे के पीछे से वह लोग खेलते रहे जो साथ में रहकर यूनियन को दगाबाजी देकर इस चुनाव में आसानी से निकल गए उत्तरांचल प्रेस क्लब का चुनाव कोषाध्यक्ष पद पर बेहद दिलचस्प रहा जिसमें यूनियन को कड़ी टक्कर अपने ही लोगों ने बड़ी चालाकी से दी समय रहते अगर यूनियन चेहरों को पकड़ लेती तो आज परिणाम कुछ और होता आने वाले समय में उत्तरांचल प्रेस क्लब के चुनाव में चाणक्य की भूमिका निभाने वाले नवीन जी उत्तरांचल प्रेस क्लब की दूसरे वरिष्ठ लोग और यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष चेतन गुरुंग महामंत्री गिरधर शर्मा जी को भी यह जरूर सोचना होगा कि इस चूक के कारण क्या रहे।
चुनाव में हार जीत लगी रहती है लेकिन कोषाध्यक्ष पद पर महज 3 वोटों से जीत हासिल करना कोई बड़ी जीत नहीं अगर नतीजे हार के रूप में सामने होते तो यह कहना कोई बड़ी बात नहीं होती अपनों ने आपको धोखा दिया है इस चुनाव में यह बात तो उभरकर सामने आई कि आखिर वह चेहरे कौन थे जो आपके साथ रहकर यूनियन से दगाबाजी कर गए क्या अब ऐसे दगाबाज लोगों को नजरअंदाज कर आने वाले समय में एक स्वस्थ परंपरा को आगे बढ़ाने में भूमिका बनाई जानी जरूरी, जरूरी इसलिए भी है कि हर साल उत्तरांचल प्रेस क्लब का चुनाव संपन्न होता है आने वाले चुनाव इस साल निभाई गई परिवार रूपी यूनियन के साथ ये दगाबाजी के नाम वो चेहरे अलग करने होगे ताकि भरोसे क़त्ल ना हो सके।
ऐसी उम्मीद यूनियन के पदाधिकारियों से जरूर की जा रही है क्योंकि साल भर का वक्त यूनियन ऐसे लोगों को परखने में निभाया जा सकता है जो यूनियन के लिए मजबूत स्तंभ बन सकते हैं यूनियन के पैनल में शामिल होने के लिए कुछ लोगों ने यूनियन के साथ दगाबाजी करने का जो खेल उत्तरांचल प्रेस क्लब के चुनाव में अंजाम दिया उनके पर्दे भी खुलकर साफ बयां कर रही हैं उन्होंने अपना जो किरदार चुनाव में निभाया है वह पूरी तरह बेपर्दा हो गया है भले ही वह सोच रहे हो कि यूनियन की जीत कैसे हुई तो यह यूनियन की एकजुटता का परिचय रहा लोग यूनियन के साथ खड़े रहे और परिणाम भले ही 3 वोटों से जीत का रहा।
लेकिन यूनियन के पक्ष में ही गया कार्यकारिणी के सदस्य पदों पर हुए चुनाव में भी मुकाबला रोचक बना रहा और ऐसे में लाजमी था जिन्होंने यूनियन से दगाबाजी कर दूसरों पर भरोसा जताया उनकी जीत स्वाभाविक थी दगाबाजी का यह खेल उनको मुबारक जिन्होंने अपने आत्मसम्मान से समझौता कर दूसरे पर खंजर घोंपा लेकिन अच्छा होता कि वह सीने में खंजर मारते और पीठ में वार नहीं करते ऐसे लोगों से सतर्क और अलर्ट रहने की इसलिए भी आवश्यकता है क्योंकि उत्तरांचल प्रेस क्लब के चुनाव में आगे की भूमिका यूनियन ठोस तरीके से निभाएगी और ऐसे लोगों का मुकाबला करेगी जो अब तक इस तरह के खेल को अंजाम दे चुके हैं उम्मीद है ऐसे लोगों को चिन्हित करने का रास्ता भी जल्द तय करें तो यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है ताकि एक स्वस्थ परंपरा का ध्वजवाहक उत्तराखंड पत्रकार यूनियन बन सके।

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