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उत्तरकाशी में तबाही सरकार ने सरकारी मशीनरी लगाई देहरादून उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के दुचाणू, टिकोची, माकुली और स्नेल गांव में बादल फटने से टौंस नदी उफान पर आ गई। उसके बाद जो हुआ उसने 2013 में आई केदारनाथ आपदा की याद दिला दी। उत्तरकाशी के मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में शनिवार देर रात बादल फटने से कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों मकान पानी के सैलाब में समा गए। रविवार देर शाम तक आराकोट और माकुड़ी से आठ लोगों के शव बरामद हो चुके थे। सोमवार को मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है प्रभावित इलाको में अभी रेस्क्यू ओपरेशन चल रहा है ।
मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में शनिवार देर रात बादल फटने के बाद माकुड़ी गांव के गदेरे में आए उफान से कई मकान जमींदोज हो गए। आपदा प्रबंधन दल में शामिल भगत सिंह रावत ने बताया कि माकुड़ी गांव में मलबे में दबे पांच लोगों के शव बरामद हो गए हैं। इनकी पहचान चतर सिंह (55) पुत्र कुंदन सिंह, उनकी पत्नी कलावती (45), कलावती (35) पत्नी किशन सिंह, ऋतिका (17) पुत्री किशन सिंह और सरोजनी देवी (31) पत्नी उपेंद्र सिंह के रूप में हुई है।
उत्तराखंड सरकार ने राहत बचाव कार्य में हेलीकॉप्टर को लगाया गया है घायलों को लाने के लिए देहरादून के दून मेडिकल में अलग से रखे जाने के लिए वयवस्था की गयी है उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद हुए हालत को देखते हुए मोके पर राहत कार्य चल रहा है मोके पर आपदा सचिव अमित नेगी आई जी संजय गुंज्याल मोके पर पहुंचे और राहत बचाव कार्यो का जायजा लिया कई घायलों को हेलीकॉप्टर की मदद से देहरादून व हायर सेंटर भेजा गया है इसके आलावा मोरी ब्लॉक में राहत सामग्री बाटी जा रही है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में अतिवर्षा की संभावनाओं के दृष्टिगत किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी जाय। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग के भारी वर्षा के पूर्वानुमान को देखते हुए विशेष सतर्कता की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को किसी भी प्रकार के आपदा के लिए सतर्क रहने एवं शीघ्र रिस्पाँस करने को कहा है। आपदा प्रभावितों को अनुमन्य सहायता राशि भी शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिये हैं कि जिला आपदा कंट्रोल रूम का भी लगातार निरीक्षण करते रहें। ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही की जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों को आपदा के दृष्टिगत निरन्तर जनप्रतिनिधियों के सम्पर्क में रहने के भी निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर भी जनप्रतिनिधियों के फोन नम्बर की लिस्ट भी अपडेट रखी जाए, ताकि किसी भी प्रकार की घटना होने पर शीघ्र सम्पर्क किया जा सके।

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